रात्रि का दूसरा पहर सांसारिक चहल पहल में बढ़ोतरी का कारण है
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आज हम लिखतें हैं तुम सुनना नहीं चाहते , कल जब सुनना चाहोगे लिखने वाला ना होगा ..........
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