हजारों लोग हैं यहाँ
यहाँ है फिर भी सन्नाटा
अचानक रुक गई है जिंदगी
किसने है इसे बांटा
यहाँ से कौन है गुज़रा
जो उजड़ी है ये फुलवारी
किसकी है ये करतूतें
जो हो गई मौन किलकारी
ना समझो हमे यूँ कमज़ोर
क्यूँ ललकारते हो दम
आए जो तुम कभी सामने
पाओगे तुम दना दन दन
उठे जो गलत निगाहे
उस निगाह को फोड़े हम
कोई जो पुष्प तोड़े हाथ
वो हाथ ना छोड़े हम
आओ सबको बतलाएं
यहाँ हमने है क्या सिखा
हर जात के पुष्प को
अपने लहू से हैं सींचा
अगर जो याद है बाबा
तो कान्हा भी ना भूले हम
एक और शांति का पाठ
दूजा गीता का मंथन
पडोसी की निगाहें हमको
अब चोरी से बचाएंगी
भाई भाई को भाई
ना कोई भाई बनायेंगी
आज जो दूर हो हमसे
ना भूलो हो हमारा अंश
हमारी माँ सगी बहने
आज हम मौसिओ के संग
कोई जो खोट हो दिल में
उस खोट को खोलो तुम
वर्ना रिश्तेदारी भूल के
रिश्तो की जड़े चीरें हम
जब हम रिश्ते में भाई है
क्यूँ कर सोचे होए जंग
अगर जो खुल गई जंग
तो हम काम आयेंगे
अपने लहू से सींच कर
ज़मी को सुर्ख बनायेंगे
बोएँगे बम्ब खेतो में
जो राजीव बम्ब कहायेंगे
हे प्रभु एक प्रार्थना है बस तुम देना ध्यान
ना हो जंग पैदा बम्ब इतना ही दो वरदान
ना हो जंग पैदा बम्ब
सच बड़ा या झूठ
सच एक ऐसी चीज है
जो सब को नसीब है
लकिन आज के युग मे
कुछ की खो गई
कुछ रख कर भूल गए
कुछ के पास है
कुछ सत्यवादी हो गए
मै भी
सच को पूजता हूँ
हमेशा सम्भाल कर रखता हूँ
क्यूंकि उसका दुश्मन झूठ
हमेशा पिलाता है मुझे कड़वे घूँट
जब भी सच को सामने लाना चाहता हूँ
झूठ मुझे सताता हैअपना साम्राज्य याद दिलाता है
मुझसे कहता है
अरे मुर्खक्यूँ समय बर्बाद करता है
सच को याद करता है
मुझसे मांग जो मांगना है
किसको उल्टा किसको सीधा टांगना है
याद रख आज मेरा साम्राज्य है
और तुझे
किसी और का नहीं
सिर्फ मेरा हुकुम मानना है
अरे पापी
तुने एक बार हाथ बढाया था
मुझको अपनाया था
तुने सुना है दोस्त दोस्त के काम आता है
तू मुझे छोड़ के जाता है
मुझे देख
मै आज भी तेरे साथ हूँ था रहूँगा
तू ग़लत काम करयो
मै बचाता रहूँगा
अगर फिर भी
सच अपनाने की ठानी
छोड़ी न अपनी मनमानी
तो याद रख
आज तक तो दोस्ती देखी है
फिर पड़ेगी दुश्मनी निभानी
न पिटता हुआ पिटवा दूंगा
सरे आम मरवा दूंगा
दफ्तर में कलह
घर से निकलवा दूंगा
तू बड़ा मेरे बल पर छाती ताने घूमता है
अरे तन के सारे कपड़े उतरवा दूंगा
प्यार से कह रहा हूँ
दोस्त मान जा
सच से कुछ नहीं होने वाला
झूठ को पहचान जा
जब भी मेरे सामने ये घटना आती है
झूठ की याद सताती है
क्यूंकि जब भी सच बोला
दुख ही झेला
चुपचाप बताता हूँ
सच को भी पूजना चाहता हूँ
लेकिन
झूठ के डर से
तिजोरी में रखता हूँ
सामने लाने में घबराता हूँ
सिर्फ रोया सिर्फ रोया
कौन हूँ मै, आया कैसे , क्या होगा सोच, जमा रक्त हुआ था
तभी किरण सी एक थी चमकी, ध्वनि कानो में एक धमकी
सभी अपने पूर्व में जाएँ, अच्छे बुरे का सब हिसाब बताएँ
मै अपनी यादों में खोया हिसाब किया क्या पाया क्या खोया
आह! सोचते ही सिर्फ रोया सिर्फ रोया..........
रातों को तो था मै सोया, स्वपनों में था सिर्फ मै खोया
दिनों को जागा, दिनों दिन भागा, सोया खोया, जागा भागा
पर इस चक्र में, कुछ ना पाया, सोचा जो क्या पाया क्या खोया
आह सोचते ही सिर्फ रोया सिर्फ रोया ..........
सभी तो थे, पर कोई ना था, सब कुछ था, कुछ ना था
जो जोड़ा था वो छोड़ा था, पर साथ ले जाऊं गुण थोडा था
खून के साथी साथ में ना थे, अवगुण थे गुण साथ ना थे
लकड़ी पाई अग्नि पाई, माटी माटी के संग आई
लोटा भर गंगाजल पाया, लगा मुझे क्यूँ था मै आया
सोचा जो क्या पाया क्या खोया,
आह सोचते ही सिर्फ रोया सिर्फ रोया..............
अब करने को हम ना थे, सहने को कोई ग़म ना थे
जो कुछ सहा सब छोड़ा छाडा, बस गज़ भर का लट्ठा फाड़ा
सफ़र में चलने को त्यारी, कंधो पे थी पालकी हमारी
सब के मुख एक ही सुर था, अंतिम यात्रा का ये गुर था
कहने को सब अपने थे, जागे हुए कुछ सपने थे
अब आँख मिची हम जागे हैं, मरघट छोड़ सब भागे है
सोचा जो क्या पाया क्या खोया
आह सोचते ही सिर्फ रोया सिर्फ रोया ..........
मै अलसाया गुथ रहा था
क्यूँ हुई यह छद्म सुबह
बहकाती है बेवजह
ढले तलक ये दोडाएगी
अंत में फिर घर लाएगी
बेकर्म कर्म पछताना क्यूँ
सुबह का आना पल भर है
पल भर को बाट जोहना क्यूँ
क्या सांझ की चाह हमें है
शीतलता की राह हमे है
जो देगी तीन पहर विश्राम
निश्चिन्तता को वो आराम
फिर काहे हम भूले साँझ
दिन का मैल बिना हम मांझ
सत्यता जब समक्ष खड़ी है
लुप्त गुप्त ये दिवस घडी है
आओ साँझ के घर को जाएँ
रिश्तों को हम और बढाएँ
आराम अंत विश्राम अनंत
पड़ाव ध्यान हैं साँझ के भाई
निद्रा, मूर्छा, निर्विघन चेतना
अंतिम वेदना सी बहने पाई
इनसे नाता है तुझे जोड़ना
दिवस ढले पड़े सब छोड़ना
मत कर जीवन अस्त व्यस्त
सांझ का आना है कटु सत्य
तलाश
बिन बंधे सफों सा
पड़ा हूँ सुनसान बस्ती में
समीर का हर झोंका
उड़ा जाता है कुछ सफे
तरसता हूँ एक हस्ती को
जो बांधे मुझे करीने से
या उड़ जाएगी मेरी हस्ती
इन सफाखोरों की बस्ती में
राधा हो चाहे मीरा हो
या हो बंसी श्याम की
तीनो ही ना हमें सुहावें
तीनो ना किसी काम की
राधा मीरा कुछ न कहती
बंसी अधरों पर ही रहती
कैसे कोई सुन पाये बोलो
बोली अपने श्याम की
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
हमको है अब श्याम से कहना
श्याम संग अब हमें भी रहना
वरना त्यागें अन्न जल हम सब
छोड़ें अपने प्राण जी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
गीता का उपदेश ना भूले
प्रेम का सन्देश ना भूले
तीनो का हम भेद करे ना
दर्शन दो हमें श्याम जी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
मीरा ने दीवानी बनकर
राधा ने सयानी बनकर
बंसी ने अधरों पर जमकर
पाया तुमको श्याम जी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
हर पहर में तुमको जपते
दर्शन को हैं हम तरसते
तीनो से जो तुम थक जाओ
आओ अंगना श्यामजी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
तीनो को हम पूजें तब ही
आप संग घनश्याम जी
"Control"
Who is controlling?
Procedure of coming
and going from world..
Feeling happiness
and sorrowfulness on earth..
Leaving and joining
Relationship
in life
Watching the things
But not watching
The essential
part for growing Things..
Who is controlling?
Oh God!
If you
Then
where are you
Rajeev searching
Please come on earth
To
control the things..
HUMANITY
To concur the world with hole in boat
Concur the heart by doing yourself
Find the way to catch the storm
To find deep the origin of earth
To find the way and aim of birth
Leave the thoughts of retaliation
Depart the act of inconsolable
Our dudgeon beats the drum of destruction
And destroying the human's constructions
Fighting for a piece of earth
Snatching the bread of others
Lets join and sign a song
That Humanity is the only cast
War will destroy human fast
You'll be remember by your past
Nothing will go in the last
