जग में सुन्दर 
ममता की मूरत 
है अपनी माँ 
घूम के देखि 
दुनिया सारी
माँ नहीं मिली वहां
कष्ट झेल कर 
नौ नौ महीने 
दुनिया हमें दिखाती 
अपने खून को 
दूध बनाकर 
छाती से है पिलाती 
ऐसा दूध 
और ऐसी ममता 
हमको मिले कहाँ 
घूम के देखि 
दुनिया सारी 
माँ नहीं मिली वहां 

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