राधा हो चाहे मीरा हो
या हो बंसी श्याम की
तीनो ही ना हमें सुहावें
तीनो ना किसी काम की
राधा मीरा कुछ न कहती
बंसी अधरों पर ही रहती
कैसे कोई सुन पाये बोलो
बोली अपने श्याम की
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
हमको है अब श्याम से कहना
श्याम संग अब हमें भी रहना
वरना त्यागें अन्न जल हम सब
छोड़ें अपने प्राण जी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
गीता का उपदेश ना भूले
प्रेम का सन्देश ना भूले
तीनो का हम भेद करे ना
दर्शन दो हमें श्याम जी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
मीरा ने दीवानी बनकर
राधा ने सयानी बनकर
बंसी ने अधरों पर जमकर
पाया तुमको श्याम जी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
हर पहर में तुमको जपते
दर्शन को हैं हम तरसते
तीनो से जो तुम थक जाओ
आओ अंगना श्यामजी
तीनो ही ना हमें सुहावें, तीनो ना किसी काम की
तीनो को हम पूजें तब ही
आप संग घनश्याम जी
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