सुबह की पहली किरण अँधेरे का बढ़ता चरण इधर रौशनी बढती है उधर बढ़ता अन्धकार परन्तु मानव बेखबर आजाता है अंधकार
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आज हम लिखतें हैं तुम सुनना नहीं चाहते , कल जब सुनना चाहोगे लिखने वाला ना होगा ..........
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